कमल किशोर कंसल
पेंशन फंड बैंक रिटायरी के रिटायरमैंट के बाद उसको मिलने वाले बैंक अंषदान का वह हिस्सा होता है जो उसको भविष्य में पेंशन देने के लिए संचित किया जाता है। इससे बैंक की लाभ हानि से कोई सरोकार नही होता जबकि सरकारी वेतन आयोग से पेंशनरों की पेंशन वृद्वि के लिए सरकार को लोकसभा से पारित करने के स्वीकृति लेनी पडती है। यह सारा भार आम आदमी करों द्वारा ही संचित राजस्व से चुकाया जाता है।
नीचे दी गई तालिका सभी बैंको द्वारा समायोजित पेंशन फंड 31 मार्च 2017 तक 2,34,531.23 लाख करोड़ की राषि दर्षा रहा है,इसके बावजूद भी पेंषन अधिनियम 1995 से लेकर अब तक भारत के सभी बैंक पेंशनरों का अपडेशन नही किया गया। नतीजा यह है कि आज सरकारी वर्ग के चपरासी की पेंशन बैंक के उच्चअधिकारी से भी बहुत ज़्यादा है। उसे स्तरीय फैमली पेंषन,चिकित्सा सुविधा प्राप्त है परन्तु बैंक पेंशनर को नही। ये भेदभाव नहीं अपितु उनके साथ बर्बरता पूर्ण व्यवहार क्यों किया जा रहा है। सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद भी उनके साथ भेदभाव क्यों?