News – Nyayshakti https://nyayshakti.com A mission to create faith in justice Sat, 28 Mar 2020 10:51:27 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=4.8.22 केंद्र और राज्य- सरकार के प्रयासों में भागीदार बन कर फूड पैकेट्स बांटते न्याय शक्ति एनजीओ के कार्यकर्ता https://nyayshakti.com/%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95-2/ Sat, 28 Mar 2020 09:51:18 +0000 http://nyayshakti.com/?p=782 कॉरॉना वायरस के द्वारा विश्व में जो कहर मचा हुआ है उससे मानवता कराह उठी है। ज़िम्मेदार देश कौन है ये आज का सवाल नहीं है पर यह आवश्यक बन रहा है कि इससे निजात पाने के लिए लंबे समय तक लॉकआउट की स्टेज आ चुकी है।
सुबह कमा कर शाम को परिवार का पेट पालने वाला गरीब वर्ग काम धंधे बन्ध होने पर भूखा न रहे इसके लिए
न्याय शक्ति एनजीओ की और से शनिवार 28 मार्च से प्रतिदिन सुबह 12 बजे और सायं 6बजे पहाड़ी धीरज स्थान से(गली नत्थ न के बाहर मैन रोड ) सदर बाज़ार दिल्ली में जरूरतमंदो को करोना से बचाव को ध्यान में रखते हुए फूड पैकेट्स बांटे जा रहे हैं।
इस सेवा कार्य में सरक्षक .श्री राजेश जैन(पूर्व विधायक), श्रीनारायण गुप्ता, अध्यक्ष श्री आर एस शर्मा, सचिव श्री संजय गुप्ता के साथ साथ संस्था के कार्यकारिणी सदस्य श्री राजेश चौधरी, सुभाष सक्सेना, तथा सेवादार सर्वश्री सुरेश अहलावत,राकेश गर्ग, जयवर्धन ढिल्लो, गौरव गर्ग,आर्यवीर चौधरी,रमेश चौधरी,ललित जी,प्रमोद जी,अजय जैन, दीपक राठौर,चौ शमशेर सिंह स्वयं हाज़िर रहे ।

 

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मेट्रो स्टेशनों पर मुफ्त में पीने का पानी और टॉयलेट की सुविधाएं क्यों नहीं- हाई कोर्ट https://nyayshakti.com/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%a4/ Wed, 07 Mar 2018 10:14:02 +0000 http://nyayshakti.com/?p=766 नई दिल्लीः दिल्ली हाईकोर्ट ने मेट्रो स्टेशनों के अंदर मुफ्त में पीने का पानी और टॉयलेट की सुविधाएं न होने के कारण डीएमआरसी पर पटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने डीएमआरसी को नोटिस जारी करते हुए 9 मई तक जवाब मांगा है। साथ ही डीएमआरसी को निर्देश दिए गए हैं कि वह यात्रियों को मुफ्त में पीने का पानी मुहैया नहीं कराने की नीति से जुड़े दस्तावेज भी अदालत में पेश करे।

डीएमआरसी पर लगाई फटकार % जस्टिस एस. रवींद्र भट और ए. के. चावला की बेंच ने डीएमआरसी से कहा कि ”क्या वह पानी और टॉयलेट की सुविधा मुहैया नहीं कराने की नीति वेस्ट से लेकर आए हैं? यहां ट्रैफिक का हाल देखिए। करोड़ों लोग मेट्रो में सफर करते हैं और यदि किसी को मेडिकल समस्या हो जाए, तो क्या होगा? वह कहां जाएगा?’ ‘बेंच ने आगे कहा कि वह जब तक स्टेशन से बाहर आएगा, तब तक काफी देर हो चुकी होगी। इस नीति के पीछे कौन-सी सोच है?

दिल्ली कोर्ट में ये सुनवाई सिंगल बेंच के उस आदेश के बाद हो रही थी, जिसमें कहा गया था कि मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों को मुफ्त में पीने का पानी पाने का अधिकार नहीं है। किसी व्यक्ति को पीने के पानी पाने का अधिकार है, लेकिन मुफ्त में नहीं है।हाई कोर्ट में ये अपील कुश कालरा ने की थी। कालरा ने कहा था कि मेट्रो में मुफ्त पानी पीने की सुविधा होनी चाहिए। वहीं उन्होंने साफ-सफाई का मुद्दा भी उठाया था।

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मेट्रो में चढ़ने से पहले अब तौलना होगा आपको अपना बैग https://nyayshakti.com/%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b2%e0%a5%82%e0%a4%9f%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%ae%e0%a4%9f%e0%a5%80/ https://nyayshakti.com/%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b2%e0%a5%82%e0%a4%9f%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%ae%e0%a4%9f%e0%a5%80/#respond Tue, 17 Oct 2017 09:33:59 +0000 http://nyayshakti.com/?p=349 नई दिल्ली। दिल्ली में मेट्रो की सवारी करने से पहले अब आपको अपने बैग के वजन का ध्यान रखना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली मेट्रो मार्च महीने से निर्धारित सीमा से ज्यादा वजन ले जाने वाले यात्रियों को सवारी करने से रोकने की तैयारी कर रही है। नई दिल्ली समेत 20 चुनिंदा स्टेशनों के लिए ये व्यवस्था लागू की जा रही है।दिल्ली मेट्रो ने हाल ही में एक्स रे स्क्रीनिंग मशीन के साथ यू शेप की मेटल बेरियर मशीन को इंस्टॉल किया है। ये मशीन ओवरसाइज बैग को स्क्रीनिंग मशीन में जाने से रोकेगी।
हाल ही में पांच मेट्रो स्टेशन पर ये व्यवस्था लागू की गई है। ये स्टेशन हैं बाराखंबा रोड, आनंद विहार, चांदनी चौक, कश्मीरी गेट और शहादरा।आगामी मार्च महीने से ये व्यवस्था 15 और स्टेशनों पर लागू कर दी जाएगी।
ये स्टेशन हैं, आदर्श नगर, आजादरपुर, बदरपुर, बॉटेनिकल गार्डन, चावड़ी बाजार, दिलशाद गार्जन, गोविंदपुरी, हुडा सिटी सेंटर, इंद्रलोक. करोलबाग, लालकिला, नांगलोई, आरके आश्रम मार्ग, रिठाला और नई दिल्ली।
डीएमआरसी के प्रवक्ता के अनुसार डीएमआरसी कानून और सीआईएसएफ से मिले इनपुट के आधार पर निर्धारित सीमा के लगेज को सुनिश्चित करने के लिए ये व्यवस्था की जा रही है।
डीएमआरसी कानून के मुताबिक कोई भी यात्री 15 किलो से ज्यादा का लगेज लेकर मेट्रो की सवारी नहीं कर सकता। हालांकि ये नियम मेट्रो की शुरुआत से है लेकिन अब इसे सख्ती के साथ लागू किया जा रहा है और यात्रियों को इस बारे में जागरुक करने का काम शुरू कर दिया गया है।इस यू शेप मशीन के लगने से सबसे ज्यादा दिक्कत नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर होने वाली है।
ऐसा इसलिए क्योंकि यहां उतरने वाले यात्रियों की संख्या बहुत ज्यादा होती है जो अन्य जगह की ट्रेन पकड़ने के लिए भारी लगेज के साथ यात्रा करते हैं। इसके अलावा इंटरचेंज प्वाइंट होने के चलते बहुत से एयरपोर्ट जाने वाले यात्री भी यहां उतरते हैं।डीएमआरसी के प्रवक्ता के मुताबिक फिलहाल हम इन पांच स्टेशनों पर ऐसे यात्रियों को वापस नहीं कर रहे हैं। ऐसे यात्रियों के लगेज को सुरक्षा बल के जवान फिजिकली चेक कर रहे हैं। हालांकि ऐसे लोगों को आगे की यात्रा के लिए आगाह किया जा रहा है कि वो निर्धारित वजन से ज्यादा का लगेज लेकर ना चलें। प्रवक्ता के मुताबिक यू शेप बैरियर फरवरी या मार्च तक 15 और स्टेशनों पर इंस्टॉल कर दिए जाएंगे। फिलहाल ऐसे यात्रियों को वापस तो नहीं भेजा जाएगा लेकिन उन्हें आगे की यात्रा के लिए आगाह जरूर किया जाएगा।जब ऐसे यात्रियों को मेट्रो में चढ़ने से रोका जाएगा तब टोकन में खर्च किए गए उनके पैंसों को लौटाया जाएगा।

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बोर्ड की परीक्षा देने जा रहे छात्र को डीटीसी बस ने कुचला https://nyayshakti.com/%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b0/ https://nyayshakti.com/%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b0/#respond Tue, 17 Oct 2017 09:30:09 +0000 http://nyayshakti.com/?p=343 नई दिल्ली। दसवीं कक्षा का छात्र जोकि शुक्रवार को अपनी बाइक से बोर्ड की परीक्षा देने जा रहा था उसकी बस की टक्कर लगने से मौत हो गई है। छात्र का नाम प्रांजल है, वह नोएडा के हरोला गांव का रहने वाला था। शुक्रवार सुबह तकरीबन 6.45 बजे जब वह रजनीगंधा चौक के पास था तो उसकी बाइक को एक बस ने टक्कर मार दी जिसके बाद उसकी मौक हो गई। छात्र 10वीं की बोर्ड की अंग्रेजी की परीक्षा देने जा रहा था, उसके साथ एक और दोस्त भी बाइक पर सवार था।छात्र प्रांजल सरकारी हाई स्कूल, अट्टा अंग्रेजी की परीक्षा देने जा रहा था। प्रांजल के साथ उसका दोस्त तालीम भी था। चश्मदीद का कहना है कि एक्सिडेंट के बाद प्रांजल को मैक्स अस्पताल ले जाया गया, उसके बाद उसे कैलाश अस्पताल ले जाया गया, दोनों ही अस्पतालों ने इलाज करने से मना कर दिया। जिसके बाद उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। घटना के बाद इस मामले में सेक्टर 20 में मामला दर्ज किया गया है, पुलिस ने ड्राइवर राजेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है और बस को सीज कर दिया गया है।
प्रांजल की मां पार्वती देवी का कहना है कि प्रांजल डीटीसी बस को ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था, जिसके बाद बस ने उसे पीछे से टक्कर मार दी, जिसके चलते बाइक का संतुलन बिगड़ गया, तालीम को मामूली चोट आई, जबकि प्रांजल के सिर में गंभीर चोट आई थी। जब उसे मैक्स अस्पताल ले जाया गया तो उन लोगों ने बताया कि हम इसका इलाज नहीं कर सकते हैं। पार्वती देवी ने कहा कि उन लोगों ने हमे कैलाश अस्पताल जाने को कहा है, जहां उनकी एक्सरे मशीन काम नहीं कर रही थी, जिसके बाद हम प्रांजल को जिला अस्पताल लेकर गए, जहां उसकी मौत हो गई। हम चाहते हैं कि कैलाश अस्पताल व मैक्स अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाए।हीं गौतम बुद्ध नगर के डीएम बीएन सिंह ने कहा कि हम इस मामले को देख रहे हैं अगर अस्पताल दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। चीफ मेडिकल ऑफिसर अनुराग भार्गव ने कहा कि वह परिवार के सदस्यों से मिलने जा रहे हैं, हमने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। मैक्स अस्पताल ने अपने बयान में कहा कि मरीज को अस्पताल लाया गया था, जिसका खून नाक व कान से काफी बह रहा था, उसका तुरंत एनसीसीटी स्कैन किया जाना था, जोकि मैक्स अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, इस बारे में मरीज के परिजन को बताया गया था। मैक्स अस्पताल के आपातकालीन डॉक्टर ने एंबुलेंस के जरिए उसे बेहतर अस्पताल भेजा, लेकिन मरीज के साथ व्यक्ति उसे दूसरे अस्पातल लेकर गए।

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नहर में रूके गंदे और बदबूदार पानी में धुलती हैं सब्जियां https://nyayshakti.com/%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%a6/ https://nyayshakti.com/%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%a6/#respond Tue, 17 Oct 2017 09:23:14 +0000 http://nyayshakti.com/?p=334 दिल्ली, राजधानी में पुरानी सब्जी मंडी से स्थानान्तरित हुई नई सब्जी मंडी जिसे आजादपुर मंडी के नाम से जाना जाता है आज फलों और सब्जियों के व्यापार के लिए थोक बाजार बना हुआ है। इस मंडी से प्रतिदिन हजारों टन सब्जियां, फल इत्यादि दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में आता और जाता है। इसी मंडी से थोड़ी दूरी पर रोहिणी, शालीमार बाग, केशव पुरम से गुजरती हुई एक प्रेमबाड़ी के नाम से एक नहर और उस पर बने हुए पुल भी हैं जिसमें हरियाणा से अक्सर पानी छोड़ा जाता है जो बाद में एक नाले में मिलकर यमुना नदी में गिरता है।
आजादपुर मंडी से खरीदी गई सब्जियों मसलन मूली, छोलियां, गाजरें, आलू, हरी सब्जियां,फल इत्यादि को अक्सर कई फुटकर खरीद करके बेचने वाले इन्हे पहले अकसर यहां भी धोते हैं। इस नहर के ठहरे हुए बदबूदार और गंदे पानी में कुछ लोग मूलियां, छोलियां और हरी सब्जियां धो रहे थे। पूछने पर जानकारी प्राप्त हुई कि जब भी मंडी से ऐसा सामान खरीदते हैं तो साथ ही में नहर के पानी में धोकर अपनी-अपनी दुकानों या छोटी-छोटी मंडियों में बिक्री के लिए हमेशा ले जाते हैं। आपको आज यहां इक्का-दुक्का लोग ही नजर आ रहे हैं मगर ठीक समय पर आप अगर यहां आकर देखें तो यहां इतनी भीड़ भाड़ नजर आएगी मानो मेला लगा हुआ हो। उस शख्स के बोलने के लहजे में जरा भी फिक्र नहीं थी कि जिस गंदे और बदबूदार पानी में सब्जियां धोई जा रही हैं उससे खाने वाले को गंभीर बीमारी होने का खतरा भी हो सकता है। संक्रमण भी हो सकता है। प्रकाशित चित्र में केवल कुछ सब्जियों को धुलते हुए दिखाया गया है। इस प्रकार से सब्जियों की धुलाई के प्रति दिल्ली सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय, पुलिस और प्रशासन का मौन हैरान करने वाला है। उम्मीद है दिल्ली सरकार और प्रशासन इस विषय पर संज्ञान अवश्य लेगा।

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वाल्ड सिटी ऐरिया का दर्द जानो- सदर बाजार में कारोबार कठिन https://nyayshakti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%90%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%9c/ https://nyayshakti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%90%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%9c/#respond Tue, 17 Oct 2017 09:22:02 +0000 http://nyayshakti.com/?p=331 दिल्ली, वाल्ड सिटी के नाम से मशहूर पुरानी दिल्ली का चांदनी चौक से सटा क्षेत्र व्यापारिक महत्व के लिए ज्यादा जाना जाता है। लुटियन की दिल्ली भी इसी बात का द्योतक है। सदर बाजार से लेकर कुतुब रोड, नया बाजार, खारी बावली, फतेहपुरी, चांदनी चौक, नई सड़क, चावड़ी बाजार, जामा मस्जिद एवं अन्य छोटे-मोटे व्यापारिक क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार का प्रतिदिन थोक का कारोबार करोड़ों अरबों के हिसाब से किया जाता है। दिल्ली और आसपास के व्यापारी से लेकर आम ग्राहक भी इन्हीं बाजारों से खरीददारी करते हैं। सदर बाजार एक ऐसा व्यापारिक केन्द्र है जिसमें लगभग सभी गतिविधियां समाहित हैं। इसके साथ ही नया बाजार है जो अनाज मंडी के नाम से प्रसिद्ध है साथ ही खारी बावली और फतेहपुरी है जो कैमिकल और ड्राई फ्रूट की मंडी के नाम से मशहूर है। इसके साथ ही सटा हआ है चांदनी चौक का इलाका जहां ज्यादातर कपड़े का व्यापार होता है। इसी के साथ सटी हुई नई सड़क और फिर चावड़ी बाजार व्यापारिक केन्द्र है जहां कागज, लोहा इत्यादि थोक के आधार पर बिक्री किया जाता है। इसी वाल्ड सिटी क्षेत्र में प्रतिदिन लाखों की तादाद में व्यापारी और ग्राहक आते-जाते रहते हैं परन्तु यहां सुविधा नाम की कोई चीज नहीं नजर आती।
इन व्यापारिक केन्द्रों से प्रतिदिन सरकार को अरबों रुपए का राजस्व करों द्वारा मिलता है। इसके बावजूद भी यह समूचा क्षेत्र प्रशासन की निगाहों में नजर अंदाज होता रहा है और हो रहा है।
इन समूचे व्यापारिक क्षेत्रों में कुकुरमुत्ते की तरह अनेकों व्यापारिक संघ भी बने हुए हैं और इनके साथ सटे हुए रिहायशी क्षेत्रों में आरडब्लयूए। इसके बावजूद भी यह समूचा क्षेत्र व्यापारिक क्षेत्र न लगते हुए एक सब्जी मंडी की तरह लगता है जहां धक्कम पेली के साथ भीड़ ही भीड़ नजर आती है और हर कोई अपना काम करके यहां से भागना चाहता है। यह समूचा क्षेत्र जहां व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है ठीक वहीं पर हजारों के लिए रोजगार का जरिया भी है। इस समूचे इलाके में प्रतिदिन हजारों गाड़ियां आती-जाती रहती हैं। इनके अलावा आम ग्राहक के यात्रा साधन भी हैं। सामान लाने ले जाने के लिए ऑटो, ठेले, हाथ रिक्शे भी मौजूद रहते हैं। दिखावे के लिए यहां पर जगह-जगह पुलिस चौकियां भी हैं जो सिर्फ देखने के लिए हैं या व्यवस्था नियंत्रण के नाम पर मात्र औपचारिकता निभाने के लिए ड्यूटी पर खड़े रहते हैं। बारा टूटी चौक हो या कुतुब रोड की सड़कें, नया बाजार हो या चावड़ी बाजार, सड़कांे पर विभिन्न वाहन बेतरतीब तरीके से सड़कों को घेरकर ऐसे खड़े होते हैं कि पैदल निकलना भी मुष्किल हो जाता है। मात्र चांदनी चौक में पार्किंग सुविधा है जो समुचित नहीं है। किसी भी प्रकार की अनहोनी या प्राकृतिक या अप्राकृतिक दुर्घटना के घट जाने पर यहां से निकलना भी मुश्किल हो जाता है। 1996 में हुए धमाके की स्थिति को नजरअंदाज किया नहीं जाना चाहिए था परन्तु वैसी ही स्थिति की पुर्नकल्पना ही रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। आजकल इन क्षेत्रों में ई रिकषाओं ने और भी कहर मचा रखा है जिनकी आने-जाने की कोई चेकलिस्ट भी नहीं है। कौन आ रहा है, कौन जा रहा है, कोई नहीं जानता। व्यापारिक केन्द्र होेने के कारण यहां कोई भी, कभी भी, कितनी ही बार आ जा सकता है। ऐसे में कोई भी असामाजिक तत्व इस व्यवस्था का भरपूर लाभ उठाकर क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।
सरकार सुविधा देने के नाम पर शून्य है परन्तु टैक्स बढ़ाने के नाम पर सबसे आगे। एक्साइज ड्यूटी बढ़ाना, वैट की दरें मंहगी करना, सेवा कर में बढ़ोत्तरी इत्यादि इत्यादि से सरकार को राजस्व कमाना आता है परन्तु उसका कुछ प्रतिशत उन क्षेत्रों के विकास पर खर्च करना नहीं आता जहां से उन्हें प्रतिदिन करोड़ों रुपए का राजस्व मिल रहा है। असूलन इस समूचे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिएं जिनसे हर प्रकार की गतिविधि पर नियंत्रण रखा जा सके। रिक्शे, ठेले, ऑटो जहां मर्जी खड़े कर दिए जाएं, कोई पूछने वाला नहीं। कई बार तो पैदल चलने में भी दिक्कत होने लगती है। महिलाओं की जरुरतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
बारिशों के दिनों में तो यहां चलना मुश्किल हो जाता है। ज्यादा बारिश होने पर पानी की ऊचित निकास व्यवस्था न होने के कारण कई बार तो दुकानों के अंदर भी पानी भर जाता है। इस संबंध में शिकायत करने पर न विधायक सुनता है और न ही सांसद। बस भुगतते सिर्फ वह व्यापारी और ग्राहक हैं जिनके द्वारा किए गए व्यापार से प्राप्त किए गए राजस्व की बदौलत एमएलए और एमपी को करोड़ों रुपए की विकास राशि विकास करने के लिए मिलती है और क्षेत्र के विकास पर खर्च नहीं होती। यदि ईमानदारी से यह एक एमएलए/एमपी की चुनाव अवधि के दौरान यही विकास राशि उपयुक्त ढंग से खर्च की होती तो इन क्षेत्रों की दशा अलग कहानी कह रही होती।
एसोसिएशनें भी हैं और उन्हें चलाने वाले भी। शिकायतें भी दर्ज होती हैं और फाइलें भी चलती हैं परन्तु सब हवा-हवाई हो रहा है, वास्तविकता से कोसो दूर है। नतीजतन सदर बाजार और उसके आसपास का सटा हुआ ऐतिहासिक व्यापारिक केन्द्र आज इतनी बदतर स्थिति में नहीं होता।
कब होगी सुनवाई इन महत्वपूर्ण व्यापारिक स्थलों की, कब मिलेगी राहत यहां पर हजारों व्यापारियों को, कर्मचारियों को और आने जाने वाले आम और विशेष ग्राहकों को जो सुविधा की आस लगाकर यहां आते हैं।

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निरंकुश हुए मिलावटखोर https://nyayshakti.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b6-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%9f%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%b0/ https://nyayshakti.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b6-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%9f%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%b0/#respond Tue, 17 Oct 2017 09:20:05 +0000 http://nyayshakti.com/?p=328 आजकल मिलावटी कारोबार निरंकुश बन चुका है जैसे उन्हे किसी भी कानून का डर न हो। जहां देखो सब नकली ही नकली है, आज बाजार में तमाम खाद्य पदार्थ से लेकर ब्लड,दवा और तो और शरीर के अंग इत्यादि सभी कुछ नकली घडले से बिक रहे हैं। रिफाइन्ड और वनस्पति घी से असली घी बनाया जा रहा है । एक मिलावटखोर को पकडा जाता है तो दस और पैदा हो जाते हैं जो नकली ब्रांड को असली ब्रांड के पैकेट में बेचने को तैयार खडे हैं। कभी पहले मिलावट करने से पहले यह सोच तो लिया जाता था कि कहीं थोड़ी सी मिलावट लोगों के लिये जानलेवा साबित न हो जाय परन्तु आज मिलावटखोरों ने इस संबध में ऐसा कुछ सोचना बिलकुल ही छोड़ दिया है। सब धनपिपासु बन गये हैं। अब तो हर कुछ खुले आम किया जा रहा है चाहे वह दूध के नाम पर कपडे धोने का पाउडर से बना ज़हरीला दूध हो या पशुओं की चर्बी से बना हुआ देसी घी। आज सब कुछ मार्केट में उपलब्ध है। बस खरीदने वाला होना चाहिए,मिलावट खोर तो सब कुछ बेचने को तैयार बैठे हैं। सावधान देखना तो हमे और आपको ही है कि कहीं हम और आप घोखे में अमृत के बदले ज़हर तो नही खा रहे। मूल्य चुका कर भी सेहत के साथ खिलवाड तो नही कर रहे।

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बेलगाम घोड़े बने ई-रिक्शा दिल्ली के लिए सिर दर्द https://nyayshakti.com/%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%98%e0%a5%8b%e0%a5%9c%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%88-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%a6/ https://nyayshakti.com/%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%98%e0%a5%8b%e0%a5%9c%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%88-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%a6/#respond Tue, 17 Oct 2017 09:19:14 +0000 http://nyayshakti.com/?p=325 दिल्ली, आज से लगभग एक वर्ष पूर्व तक राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों को जाम में फंसाने के लिए दिल्ली में चल रहे लाखों की संख्या में हाथ रिक्शा से लोग परेशान थे। अब ऐसा लगता है उनका स्थान बैटरी द्वारा संचालित रिक्शा यानि ई-रिक्शाओं ने ले लिया है। आज आलम यह है कि धीरे-धीरे हाथ रिक्शा गायब होते जा रहे हैं और उनके स्थान पर ई-रिक्शा की भीड़ दिखने लग गई है। पहले जहां-जहां हाथ रिक्शा बेतरतीबी से खड़े नजर आते थे आज वहां हाथ रिक्शाओं के साथ-साथ बेशुमार ई-रिक्शा भी खड़े नजर आ रहे हैं। पैदल आने-जाने वालों के साथ-साथ अन्य वाहन भी बेबस हो रहे हैं। हर चौराहे की चारों साईडों पर यह अनुशासनहीन होकर अपने रिक्शा ऐसे खड़े कर देते हैं जिससे पैदल यात्री, स्कूटर, थ्रीव्हीलर, कार और अन्य वाहनों सहित राजधानी में चलने वाले डीटीसी के वाहन भी फंस जाते हैं। घंटों तक जाम लग जाने का यह मुख्य कारण सिद्ध हो रहे हैं। वहां मौजूद यातायात पुलिस भी इनका कुछ बिगाड़ नहीं पाती। पुरानी दिल्ली में तो विशेषकर इस तरह के नजारे दिख सकते हैं और तो और मेट्रो स्टेशनों के बाहर भी इनकी भीड़ से आने-जाने वाले परेशान हो चुके हैं। यातायात पुलिस अधिकारियों के अनुसार अधिकांश ऐसे रिक्शों का कोई रजिस्ट्रेशन न होने के कारण इनके चालान का प्रावधान संभव नहीं हो रहा। हम ज्यादा से ज्यादा कभी-कभी इनके पहियों की हवा निकाल देते है परन्तु यह फिर वापिस लौट आते हैं फिर एकजुट होकर खुद को आम आदमी होने की बात कहकर “आप” की दिल्ली सरकार को शिकायत करने घमकी देकर दबाव डालते है। पुलिस वालों के सामने बड़ा धर्मसंकट खड़ा हो चुका है। अब ई-रिक्शा चलाने वाले निरंकुश हो चुके है और जब तक इनके लिए कोई सरकार द्वारा नियम कानून नहीं बनेगा तब तक इनका रवैया ऐसा या और भी टेढ़ा चले, कुछ नहीं कहा जा सकता।
प्राप्त सूचनाओं के अनुसार इन ई-रिक्शा चलाने वालों में कुछ आपराधिक और असामाजिक तत्व भी शामिल हो चुके है जो अपनी अपराधिक गतिविधियों के द्वारा यात्रियों को विशेषकर महिलाओं को लूटने में जुटे हुए है। एक सूचना के अनुसार सब्जी मंडी क्षेत्र की एक महिला के साथ एक ऐसी वारदात घटित हो चुकी है जिसमें उसे हिप्नोटाईज सा करके उसकी लाखों रुपए के गहने और कुछ नकदी भी लूटी जा चुकीे है।
सरकार को शीघ्र ही इस विषय में इन पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस नीति, नियम और कानून बनाने चाहिएं ताकि स्थिति नियंत्राण में रह सके वरना देरी हो जाने पर कल को ई-रिक्शा भी एक सामाजिक नासूर बन सकता है। ये आजकल ऐसे बेलगाम घोड़े बन चुके हैं जो किसी की नही सुन रहे। हर चौराहे पर इनकी वजह से जाम लगना आम बात हो गई है। अपनी मनमानियों की वज़ह से ये दिल्ली वालों को बीते हुए कल के कलंक बन चुकी रेड लाईन बसों की यादें ताज़ा करवा रहे हैं।

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Uncontroled misuse of LPG cooking gas https://nyayshakti.com/uncontroled-misuse-of-lpg-cooking-gas/ https://nyayshakti.com/uncontroled-misuse-of-lpg-cooking-gas/#respond Fri, 13 Oct 2017 09:45:06 +0000 http://nyayshakti.com/?p=46 After waiving restriction on lpg subsidised domestic cylinders it is a matter of great surprise that domestic LPG gas cylinders are still being used for commercial purposes in roadside eateries, dhabas,restaurants etc etc. These cylinders are being sold at high premium to the illegal roadside eateries. They get it within 10-15 minutes on making a call to the gas agencies or some black markteers. Is it not shocking that a domestic consumer has to wait for few days to meet his urgent domestic requirment but this does not apply on the misusers . In Delhi, LPG has been playing important role in cooking in some areas where there is no other alternative fuel available for Delhiites like supply through underground pipes, the suplly of the refill needs to be made within 24 hours from the time of online refil booking system. Many consumers have reported for receipts of low gas or under weight capacity in cylinders and complained.Even after their making complaints to the Headquarters of the respective companies, no one bothers to look into the complaints to provide the same. The situation is worsening day by day and there is no respite to the consumers. Such problems have been highlighted in many other newspapers but the grievances of the consumers continue as before. We ,once again, reiterate that the supply of domestic LPG cylinders should be restricted to domestic consumers only and any commercial usage of domestic LPG cyclinders should be controlled with heavy hands. Even the rules provide for seven years imprisonment if the domestic LPG cylinders are used for commercial purposes. Anyone can be horrified to see that domestic LPG cylinders were being used with impunity by the roadside eatiers, dhabas and restaurants, marrige parties, private functions,halwai’s,catterers etc. etc . This can also be viewed in open space like streets and roads. It is causing heavy loss to the Oil companies as well as it is creating artificial scarcity of LPG cyclinders due to its diversion for commercial purposes and thus causes inconvenience to the householders who have to wait for days together to get their replacement refills after booking.

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